“युवक (Youth~युथ) कौन है? युवक होने का अर्थ क्या है?” – ओशो
युवकों के लिए कुछ भी बोलने के पहले यह ठीक से समझ लेना जरूरी है कि युवक का अर्थ क्या है?
युवक का कोई भी संबंध शरीर की अवस्था से नहीं है। उम्र से युवा है। उम्र का कोई भी संबंध नहीं है। बूढ़े भी युवा हो सकते हैं, और युवा भी बूढ़ा हो सकते हैं। लेकिन ऐसा कभी—कभी ही होता है कि बूढ़े युवा हो, ऐसा अकसर होता है कि युवा बूढ़े होते हैं। और इस देश में तो युवक पैदा होते हैं यह संदिग्ध बात है।
युवा होने का अर्थ है—चित्त की एक दशा, चित्त की एक जीवंत दशा, लिविंग स्टेट ऑफ माइंड। बूढ़े होने का अर्थ है—चित्त की मरी हुई दशा।
‘इस देश में युवक पैदा ही शायद नहीं होते हैं। ‘जब ऐसा मैं कहता हूं तो उसका अर्थ यही है कि हमारा चित्त जीवंत नहीं है। वह जो जीवन का उत्साह, वह जो जीवन का आनंद और संगीत हमारे हृदय की वीणा पर होना चाहिए, वह नहीं है। आंखों में, प्राणों में, रोम—रोम में, वह जो जीवन को जो। की उद्दाम लालसा होनी चाहिए, वह हममें नहीं है। जीवन को जियें, इससे पहले ही हम जीवन से उदास हो जाते हैं। जीवन को जानें, इससे पहले।। हम जीवन को जानने की जिज्ञासा की हत्या कर देते हैं।
अगर जीवन का रस भी अदभुत नहीं है तो अदभुत क्या होगा? जिनके लिए जीवन का रस ही व्यर्थ है, उसके लिए सार्थकता कहां मिलेगी? फिर वे खोजें और खोजें। वे जितना खोजेंगे, उतना ही खोते चले जायेंगे। क्योंकि जीवन ही है एक सारभूत, जीवन ही है एक रस, जीवन ही है एक सत्य। उसमें ही छिपा है सारा सौन्दर्य, सारा आनंद, सारा संगीत।
लेकिन भारत में युवक उस जीवन के उद्दाम वेग से आपूरित नहीं मालूम पड़ते और न ऐसा लगता है कि उनके है में, उनके प्राणों में उन शिखरों को छूने की कोई आकांक्षा है, जो जीवन के शिखर हैं। न ऐसा लगता है कि अतीत शिखरों को खोजने के लिए प्राणों में कोई प्रबल पीड़ा है—उन शिखरों को जो जीवन के शिखर हैं, जीवन के अंधेरे को, न जीवन के प्रकाश को, न जीवन की गहराई को, न जीवन की ऊंचाई को, न जीवन की को, न जीवन की जीत को, कुछ भी जानने का जो उद्दाम वेग, जो गति, जो ऊर्जा होनी चाहिए, वह युवक के पास नहीं है। इसलिए युवक भारत में हैं—ऐसा कहना केवल औपचारिकता है, फार्मिलिटी है।
भारत में युवक नहीं हैं, भारत हजारों साल से बूढ़ा देश है। उसमें बूढ़े पैदा होते हैं, बूढ़े ही जीते हैं और बूढ़े मरते हैं। न बच्चे पैदा होते हैं, न जवान पैदा होते हैं। हम इतने बूढ़े हो गये है कि हमारी जड़ें ही जीवन के रस को नहीं खींचती और न हमारी शाखाएं जीवन के आकाश में फैलती हैं और न हमारी शाखाओं में जीवन के पक्षी बसेरा करते हैं और न हमारी शाखाओं पर जीवन का सूरज उगता है और न जीवन का चांद चांदनी बरसात। है, सिर्फ धूल जमती जाती है, जड़ें सूखती जाती हैं, पत्ते कुम्हलाते जाते हैं। फूल पैदा नहीं होते, फल आते नहीं हैं। वृक्ष हैं, न उनमें पत्ते हैं, न फूल हैं। सूखी शाखाएं खड़ी हैं। ऐसा अभागा हो गया है यह देश!
जब युवकों के संबंध में कुछ बोलना हो तो पहली बात यही ध्यान देनी जरूरी है। यदि युवक कोई शारीरिक अवस्था है, तब तो हमारे पास भी युवक हैं। युवक अगर कोई मानसिक दशा है, स्टेट आफ माइंड है, तो युवक हमारे पास नहीं हैं।
अगर युवक हमारे पास होते तो देश में इतनी गंदगी, इतनी सड़ांध, इतना सड़ा हुआ समाज जीवित रह सकता था? कभी की उन्होंने आग लगा दी होती। अगर युवक हमारे पास होते, तो हम एक हजार साल तक गुलाम रहते? कभी की गुलामी को उन्होंने उखाड़ फेंका होता। अगर युवक हमारे पास होते तो हम हजारों—हजारों साल तक दरिद्रता और दीनता और दुख में बिताते? हमने कभी की दरिद्रता मिटा दी होती या खुद मिट गये होते।
लेकिन नहीं, युवक शायद नहीं हैं। युवक हमारे पास होते तो इतना पाखंड, इतना अंधविश्वास पलता इस देश में? युवक बरदाश्त करते? एक—एक करोड़ रुपये यज्ञों में जलाने देते, युवक अगर मुल्क के पास होते? अब मैं सुनता हूं कि और भी करोड़ों रुपये जलाने का इंतजाम करने के लिए साधु—संन्यासी लालायित हैं। और युवक ही जाकर चंदा इकट्ठा करेंगे और वालंटियर बनकर उस यज्ञ को करवाये जायेंगे, जहां देश की संपत्ति जलेगी निपट गंवारी में! अगर युवक मुल्क में होते तो ऐसे लोगों को क्रिमिनल्स कहकर, पकड़कर अदालतों में खड़ा किया होता, जो मुल्क की संपत्ति को इस भांति बर्बाद करते हैं। एक करोड़ रुपये की संपत्ति जलाने में जो आदमी जितना अपराधी हो जाता है, उससे भी ज्यादा अपराधी एक करोड़ रुपये यश में जलाने से होता है। क्योंकि एक करोड़ रुपये की संपत्ति को जलाने वाला थोड़ा बहुत अपराध भी अनुभव करेगा। यश में जलाने वाले पायस क्रिमिनल है, पवित्र अपराधी हैं! उनको अपराध भी नहीं मालूम पड़ता है।
लेकिन युवक मुल्क में नहीं हैं, इसलिए किसी भी तरह की मूढ़ता चलती है, इसलिए मुल्क में किसी भी तरह का अंधकार चलता है। युवकों के होने का सबूत नहीं मिलता देश को देखकर! क्या चल रहा है देश में? युवक किसी भी चीज पर राजी हो जाते हैं!
वह युवक कैसा जिसके भीतर विद्रोह न हो, रिवोल्युशन न हो? युवक होने का मतलब क्या हुआ उसके भीतर? जो गलती के सामने झुक जाता हो, उसको युवक कैसे कहें? जो टूट जाता हो लेकिन झुकता न हो, जो मिट जाता हो लेकिन गलत को बरदाश्त न करता हो, वैसी स्पिरिट, वैसी चेतना का नाम ही युवक होना है। टु बी यंग—युवा होने का एक ही मतलब है।
वैसी आत्मा विद्रोही की, जो झुकना नहीं जानती, टूटना जानती है, जो बदलना चाहती है। जो जिंदगी को नयी दिशओ में, नये आयामों में ले जाना चाहते हैं, जो जिंदगी को परिवर्तित करना चाहते हैं। क्रांति की वह उद्दाम आकांक्षा ही युवा होने के लक्षण हैं।
— ओशो (संभोग से समाधि कि ओर–युवक कौन (ग्याहरवां प्रवचन) )
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