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“मैं गुरु किसी का भी नहीं हूं, मेरा कोई शिष्य नहीं है !” – ओशो !

भगवान श्री, आपने कहा है कि बाहर से व्यक्तित्व व चेहरे आरोपित कर लेने में सूक्ष्म चोरी है तथा इससे पाखंड और अधर्म का जन्म होता है। लेकिन देखा जा रहा है कि आजकल आपके आस-पास अनेक नये-नये ...

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“गांधी, महावीर या किसी और का खंडन क्यों?” – ओशो

प्रश्नः मेरे सामने एक दूसरा सवाल आया। कई विचारक लोग भी थे, कई लोग भी थे--आपकी जो प्रवृत्ति है, उनके प्रति थोड़ा सदभाव भी था--इनके पास धारणाएं हैं कि इंसान दो ढंग से काम करता है, सब्जेक्टिव और आब्जेक्टिव। तो ...

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“अहंकार को पूरी तरह मिटाने का सबसे तेज ढंग क्या है?” – ओशो !

Q.  अपने अहंकार को पूरी तरह और सदा के लिए मिटाने का सबसे तेज और सबसे खतरनाक ढंग क्या है? अहंकार को मिटाने का कोई ढंग ही नहीं है--न धीमा, न तेज; न सरल, न कठिन; न आसान, न खतरनाक। अहंकार ...

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“बुद्ध ने चालीस वर्षों तक लोगों को क्या सिखाया?” – ओशो

भगवान बुद्ध ने ज्ञानोपलब्धि के तुरंत बाद कहा : स्वयं ही जानकर किसको गुरु कहूं और किसको सिखाऊं, किसको शिष्य बनाऊं? और फिर उन्होंने चालीस वर्षों तक लाखों लोगों को दीक्षित भी किया और सिखाया भी। लेकिन महापरिनिर्वाण ...

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“अप्प दीपो भव !” – ओशो

गौतम बुद्ध ऐसे हैं जैसे हिमाच्छादित हिमालय। पर्वत तो और भी हैं, हिमाच्छादित पर्वत और भी हैं, पर हिमालय अतुलनीय है। उसकी कोई उपमा नहीं है। हिमालय बस हिमालय जैसा है। गौतम बुद्ध बस गौतम बुद्ध जैसे। पूरी मनुष्य-जाति के ...

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