Register Now

Login

Lost Password

Lost your password? Please enter your email address. You will receive a link and will create a new password via email.

Captcha Click on image to update the captcha .

Add question

You must login to ask a question.

Login

Register Now

Register yourself to ask questions; follow and favorite any author etc.

“क्या मनुष्य एक यंत्र है?” – ओशो

हम साधारणतः यंत्र की भांति जीते हैं, मशीनों की भांति। लेकिन हमको यह भ्रम होता है कि हम मनुष्य हैं और हम स्वतंत्र है। साधारणतः मनुष्य एक यंत्र की भांति जीता है। लेकिन वह सोचता है कि मैं ...

Continue reading

“कैसे जाने की हम विचारों से अलग है?” – ओशो

विचार के सम्यक निरीक्षण से विचार-शून्यता घटित होती है। इस आंतरिक साधना का मूल तत्व सम्यक निरीक्षण है, राइट आब्जर्वेशन है। इन तीनों चरणों में--शरीर पर, विचार पर और भाव पर--सम्यक स्मरण और सम्यक निरीक्षण, देखना। विचार की जो धाराएं हमारे ...

Continue reading

“जानिए शरीर से तादात्म्य/आइडेंटिटी तोड़ने के 2 प्रयोग ! (Disidentification)” – ओशो

शरीर के साथ हमारा तादात्म्य है, एक आइडेंटिटी है। हमें ऐसा प्रतीत नहीं होता कि हमारा शरीर है। किसी तल पर हमें प्रतीत होता रहता है, मैं शरीर हूं। मैं शरीर हूं, यह भाव विलीन हो जाए, तो शरीर-शून्यता घटित ...

Continue reading

मैत्री और प्रेम को कैसे विकसित करें? – ओशो

इसलिए मैत्री का और प्रेम का हमारे भीतर जो बिंदु है, उसे विकसित करना होगा, सारी प्रकृति के खिलाफ विकसित करना होगा, क्योंकि प्रकृति उसे विकसित होने का मौका नहीं देती है। जो आप जीवन पाते हैं, वह उसे मौका ...

Continue reading

“ध्यान-साधना में व्यायाम का महत्व !” – ओशो

शरीर के लिए थोड़ा-सा व्यायाम अत्यंत आवश्यक है। क्योंकि शरीर जिन तत्वों से मिलकर बना है, वे तत्व व्यायाम के समय में विस्तार पाते हैं। व्यायाम का मतलब, विस्तार। संकोच के विपरीत है व्यायाम शब्द। व्यायाम का अर्थ है विस्तार। ...

Continue reading

“ध्यान-साधना में भोजन का महत्व !” – ओशो

जिसको हम अपने मुल्क में आहार (भोजन) कहते हैं, वह शरीर-शुद्धि में उपयोगी है। आपका शरीर तो बिलकुल भौतिक संस्थान है। उसमें आप जो डालते हैं, उसके परिणाम होने स्वाभाविक हैं। अगर मैं शराब पी लूंगा, तो मेरे शरीर के ...

Continue reading

“प्रगाढ़ संकल्प कैसे पैदा करें? संकल्प जगाने का प्रयोग !” – ओशो

प्रगाढ़ संकल्प का यह अर्थ है, हमारा जो मन है, उसका एक बहुत छोटा-सा हिस्सा, जिसको हम चेतन मन कहते हैं, उसी में सब विचार चलते रहते हैं। उससे बहुत ज्यादा गहराइयों में हमारा नौ हिस्सा मन और है। अगर ...

Continue reading

“मानसिक या आध्यात्मिक रूप से जवान कैसे हों?” – ओशो

पहली बात, अगर बूढ़ा होना है तो मौत पर ध्यान रखना, जीवन पर नहीं। और अगर जवान होना है तो मौत को लात मार देना। वह जब आयेगी, तब मुकाबला कर लेंगे। जब तक जीते हैं, तब तक पूरी तरह से ...

Continue reading

“क्या भारत का युवक मर गया है?” – ओशो

एक विचारक भारत आया था, काउंट केसरले। लौटकर उसने एक किताब लिखी है। उस किताब को मैं पढ़ता तो मुझे बहुत हैरानी होने लगी। उसने एक वाक्य लिखा है, जो मेरी समझ के बाहर हो गया, क्योंकि वाक्य कुछ मालूम ...

Continue reading

“युवक (Youth~युथ) कौन है? युवक होने का अर्थ क्या है?” – ओशो

युवकों के लिए कुछ भी बोलने के पहले यह ठीक से समझ लेना जरूरी है कि युवक का अर्थ क्या है? युवक का कोई भी संबंध शरीर की अवस्था से नहीं है। उम्र से युवा है। उम्र का कोई भी संबंध ...

Continue reading