क्या किसी भी शारीरिक या मानसिक रोग का ईलाज ध्यान से हो सकता है? क्या ध्यान से बीमारियां, डिप्रेशन व अन्य समस्यांए ठीक हो सकती है?

Question

प्रश्न – मुझे कई तरह की बीमारियां हैं, डिप्रेशन है और कई समस्यांए हैं, क्या ध्यान से मेरी बीमारियां ठीक हो सकती है?

प्रश्नक्या किसी भी शारीरिक या मानसिक रोग का ईलाज ध्यान से हो सकता है?

प्रश्नक्या ध्यान से बीमारियां, डिप्रेशन व अन्य समस्यांए ठीक हो सकती है?

Answer ( 1 )

  1. मैं आप से निवेदन करना चाहूंगा कि आप योग्य चिकित्सक से ईलाज कराएं। किसी मनोचिकित्सक से मिले डिप्रेशन के लिए। ध्यान इसका ईलाज नहीं है। यह आप अच्छी तरह समझ लें। किसी भी शारीरिक या मानसिक रोग का ईलाज ध्यान नहीं है। नहीं तो रामकृष्ण परमहंस जैसे महाध्यानी कैसंर से न मरे होते, महर्षि रमण को कैंसर न हुआ होता। स्वामी विवेकानंद 33 साल की उमर में डाइबिटीज से न मरते। ध्यान का डाइबिटीज से क्या लेना देना। नहीं, खूब अच्छी तरह याद रखें। ये तीन-तीन हिस्से जो मैंने बताए हैं- शरीर, मन और आत्मा। हर हिस्से की अलग जरूरते हैं। अब अगर आप कहें कि मैं भोजन नहीं करूंगा, केवल ध्यान करूंगा तो काम चल जाएगा क्या? ऐसा नहीं होगा। शरीर का काम तो भोजन से ही चलेगा। मानसिक रोग हो, डिप्रेशन हो गया। यह तो किसी मनोचिकित्सक से ईलाज कराने से ठीक होगा। ध्यान से ठीक नहीं होगा। इसके कुछ कारण हैं। दिमाग में कुछ रसायन कम हो गए, कुछ रासायनिक द्रव्यों की कमी हो गयी ध्यान उन्हें पूरा न कर पाएगा। इसके लिए दवाईयां लेनी पड़ेंगी। कुछ लोग इस भूल-चूक में ध्यान करने चले आते हैं कि ध्यान से उनकी सभी शारीरिक व मानसिक परेशानियां दूर हो जाएंगी। मैं निवेदन करना चाहता हूं कि ऐसा नहीं हो सकता। ऐसा प्रचार करने वाले साधु संत भी खूब हैं। वे झूठे आश्वासन देते हैं। तभी उनके पास हजारों की भीड़ लग जाएगी।
    परन्तु मैं वही कहना चाहता हूं जो सत्य है, प्रमाणिक रूप से सत्य है। चाहे फिर मेरे पास कोई भीड़ इक्टठा नहीं होगी। ध्यान आत्मा के तल की बात है। वह चेतना का स्नान है। आत्मा की शुद्धि है। तो जिसने प्रश्न पूछा है जिन्हें यें समस्याएं हैं वे किसी योग्य चिकित्सक से ईलाज करवाएं ध्यान इसका ईलाज नहीं है। हां जब वे पूरी तरह स्वस्थ हो जाएंगी, प्रसन्न होंगी तब जरूर उनके मन में ध्यान की जिज्ञासा उत्पन होगी, तब मैं आपकी मदद कर सकूंगा। शरीर और मन के तल की जरूरतें आप स्वयं ही पूरी करो। कोई साधु, संत इन जरूरतों को पूरा नहीं कर सकता। और अगर कोई कहता है कि मेरे आशीर्वाद से, पूजा प्रार्थना से, योगाभ्यास से यह हो जाएगा, कि मंत्र ले लो, ताबीज ले लो, यह आदमी झूठ बोला रहा है। इसको भीड़ इक्टठी करने में रस है। यह एक प्रकार की राजनीति कर रहा है धर्म के नाम पर।
    ऐसे लोगों से सावधान। क्योंकि उसमें समय बहुत खराब होता है। क्योंकि कई साल लग जाएंगे तुम्हें समझने में कि तुम्हारी बीमारी ठीक नहीं हो रही। और फिर तुम किसी और संत महात्मा के चक्कर में फंस जाओगे जाकर। नहीं मैं आपको झकझोरना चाहता हूं, जगाना चाहता हूं। नहीं, ये शरीर और मन के तल की चीजें हैं इन्हें उन्हीं तलों पर ठीक करना होगा। ध्यान आत्मा की तल की बात है। जब ये दोनों तल सुन्दर हो जाएं तब उस परम आनंद की तरफ अग्रसर होना।

    ~ स्वामी शैलेंद्र सरस्वती

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