ध्यान करने पर ऊर्जा जागरण का अनुभव होता है; परन्तु सात चक्रों का अनुभव नहीं होता, ऐसा क्यों?
प्रश्न –ऊर्जा ध्यान के दौरान स्पष्ट रूपेण मैंने अपने भीतर स्ंपदित हो रही ऊर्जा को एक पुंज के रूप में महसूस किया। वह जीवंतता से धड़कता हुआ ऊर्जा पुंज एकाकार है उसमें कहीं खंड व विभाजन महसूस नहीं हुए। सब कुछ उस एक में ही समाहित जान पड़ता है। सात चक्रों का अनुभव मुझे नहीं हो पाता। न उर्ध्वगमन की न ही सहस्रार से मूलाधार तक उतरने की प्रतीति हुई। यद्यपि ऊर्जा की अनुभूति बिल्कुल स्पष्ट थी। मेरे ध्यान में कहां बाधा पड़ रही है? कृपया बताएं क्या मेरे चक्र अवरुद्ध हैं? क्या इस वजह से मुझे चक्रों का ज्ञान घटित नहीं होता?
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इसका ठीक विपरीत भी संभव है। यदि सारे चक्र खुले हुए हों तथा रास्ते में कहीं कोई अवरोध न हो तो ऊर्जा सहज रूप से बह जाती है और चक्रों का कहीं भी पता नहीं चलता। चक्रों का पता तब चलता है जब वहां पर कोई अवरोध हो, ऊर्जा अटक जाती हो। जैसे एक नदी में जल बह रहा है यदि कोई चट्टान न हो मार्ग में तो नदी के बहने से कोई आवाज नहीं होती। चुपचाप शांत मौन पानी बहा चला जाता है। जितनी चट्टानें होंगी रास्ते में जितने व्यवधान होंगे; उतनी ही जोर की आवाज होगी और पता चलेगा कि नदी बह रही है। ठीक इसी प्रकार से कुछ लोगों को ऊर्जा का अहसास तो होता है, चक्रों का पता नहीं चलता। उसके दोनों कारण संभव हैं। यदि चक्र पूरी तरह ब्लाक्ड हैं तो ऊर्जा का पता नहीं चलेगा। चट्टानें बहुत मजबूत हैं तो नदी बह ही नहीं पाएगी। आवाज पैदा होने का सवाल ही पैदा नहीं होता और अगर कहीं भी कोई चट्टान नहीं है तो चुपचाप नदी बह जाएगी। उसका भी पता नहीं चलेगा।
उपरोक्त दोनों स्थितियों में चक्रों का पता नहीं चलता। इसलिए अलग-अलग संतों ने अलग-अलग चक्रों की बात कही है। कोई कहते हैं- तीन चक्र, कोई कहते हैं पांच चक्र, कोई कहते हैं सात चक्र, कोई कहते हैं दस चक्र, कोई कहते हैं कोई भी चक्र नहीं। चक्र की बात में ही मत पड़ना, घनचक्कर हो जाओगे। कहीं कोई चक्कर-वक्कर नहीं है। जिनके मार्ग में कहीं कोई अवरोध नहीं आया वह ऊर्जा का तो अहसास करेंगे जैसे प्रश्नकर्त्ता ने यह पूछा है कि ऊर्जा व आनंद का अहसास हो रहा है, मस्ती छा रही है लेकिन चक्रों का पता नहीं चल रहा है? क्योंकि चक्रों में कहीं ब्लॅाकेज नहीं है। सब चक्र खुले हुए हैं। ऊर्जा सीधी बह जाती है और इसलिए तुम्हें उस एकाकार ऊर्जा पुंज जिसमें सब कुछ समाहित है; का पता चलता है। हमें उसी चक्र का पता चलेगा जो हमारा ब्लॅाक्ड है। किसी व्यक्ति का हृदय चक्र ब्लॅाक्ड है तो जब ऊर्जा वहां से गुजरेगी तो धक्के मारेगी, कुछ खिंचाव वहां लगेगा, स्पंदन-सा लगेगा। हल्का मीठा दर्द भी हो सकता है। वह दो-चार-छः दिन रहेगा। धीरे-धीरे विदा हो जाएगा। जब हृदय चक्र खुल जाएगा, ऊर्जा वहां से ऊपर चली जाएगी। फिर हृदय चक्र का ज्ञान नहीं होगा। पता चलना अवरोध की वजह से था।
आपने डॅाक्टर को देखा होगा ब्लड प्रेशर नापते हुए। भुजा पर रबर-कप बांधकर हवा भरने पर खून की धमनी में खून जाना बंद हो जाता है, धीरे-धीरे प्रेशर को कम करने पर एक समय आता है जब रक्त प्रवाह पुनः शुरू होता है लेकिन झटके के साथ आवाज करता हुआ। जिस दाब पर स्टेथोस्कोप द्वारा वह ‘खट-खट’ आवाज सुनी जाती है, उसे कहते हैं सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर। तब प्रेशर और कम करने पर एक दूसरी अवस्था आती है जहां स्मूथ फ्लो मैन्टेन हो जाता है। बिना आवाज के खून धमनी में बहने लगता है। उस दाब को कहते हैं डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर। सामान्य खून जो बह रहा है उसमें कोई आवाज नहीं है। चुपचाप बह रहा है। कहीं कोई ब्लॅाकेज नहीं हैं। लेकिन जब प्रेशर डाल के हमने रक्त प्रवाह को अवरुद्ध कर दिया तब आवाज शुरू हुई। अर्थात् दो ढंग से आवाज नहीं होगी या तो धमनी बिल्कुल ब्लॅाकड हो; सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर से ज्यादा प्रेशर हो तो खून के बहाव की आवाज नहीं आएगी। क्योंकि खून बह ही नहीं रहा। या फिर डायस्टोलिक प्रेशर से कम हो जाए तब भी आवाज नहीं आएगी। क्योंकि अब चुपचाप स्मूथ फ्लो आफ ब्लड मैन्टेन हो गया। बीच में आवाज आएगी। ठीक ऐसे ही समझो कि चक्रों के बारे में घटित होता है।
दूसरा उदाहरण समझो कि एक बिजली का पंखा बीस साल से नहीं चला। धूल-धवांस जम गई। चिड़िया ने घोंसला बना लिया, मकड़ी के जाले लगे हुए हैं, जंग लग चुकी। बीस साल बाद कोई बटन दबाए, बिजली की ऊर्जा पहुंचकर उसे चलाए तो बड़ी खटर-पटर की आवाज होगी। लेकिन थोड़ी देर उसे चलाते रहें, चलते-चलते धूल-धवांस गिर जाएगी। जंग घिस जाएगी। थोड़ी देर में पंखा चलने लगेगा, स्मूथली, बिना शोर-शराबे के।
ठीक ऐसे ही हमारे चक्रों की स्थिति है। अगर बहुत लम्बे समय से वे उपयेग में नहीं आए हैं तो जब पहली बार ऊर्जा वहां पहुंचकर उसे चलाने की कोशिश करती है वो प्रतिरोध पैदा करता है। उसी प्रतिरोध की वजह से उसका पता चलता है। एक बार अगर वह प्रतिरोध हट गया तो ऊर्जा सहज रूप से प्रवाहित होने लगेगी और तब उस चक्र का पता नहीं चलेगा। मगर इसका प्रमाण क्या होगा? प्रमाण यही होगा कि जिस व्यक्ति के सभी चक्र खुल गये उसे चक्र का अहसास तो नहीं होगा लेकिन उसे आनंद की अनुभूति होगी, मस्ती का भाव होगा, ऊर्जा का स्पष्ट अहसास होगा।
~ स्वामी शैलेन्द्र सरस्वती