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“जीवन का रस !” – ओशो

"मैंने सुना है, स्वर्ग के एक रेस्तरां में एक दिन सुबह एक छोटी—सी घटना घट गई। उस रेस्तरां में तीन अदभुत लोग एक टेबिल के आसपास बैठे हुए थे—गौतम बुद्ध, कन्‍फ्यूशियस, और लाओत्से। वे तीनों स्वर्ग के रेस्तरां में बैठ ...

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“स्‍त्री और पुरुष भिन्न हैं, लेकिन असमान नहीं !” – ओशो

स्‍त्री और पुरुष के इतिहास में भेद की, भिन्नता की, लम्बी कहानी जुड़ी हुई है। बहुत प्रकार के वर्ग हमने निर्मित किये हैं। गरीब का, अमीर का; धन के आधार पर, पद के आधार पर। और सबसे आश्चर्य की बात ...

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“जीवन का लक्ष्य क्या है?” – ओशो

प्रश्न - जीवन का लक्ष्य क्या है? यह प्रश्न तो बहुत सीधा-सादा मालूम पड़ता है। लेकिन शायद इससे जटिल और कोई प्रश्न नहीं है। और प्रश्न की जटिलता यह है कि इसका जो भी उत्तर होगा वह गलत होगा। इस प्रश्न ...

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“मनुष्य के ऊपर सबसे बड़े बंधन – श्रद्धा और विश्वास !” ~ ओशो

हम सारे मनुष्यों की भी स्थिति यही नहीं है? क्या हम सब भी जीवन भर नहीं चिल्लाते हैं--मोक्ष चाहिए, स्वतंत्रता चाहिए, सत्य चाहिए, आत्मा चाहिए, परमात्मा चाहिए? लेकिन मैं देखता हूं कि हम चिल्लाते तो जरूर हैं, लेकिन हम उन्हें ...

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“जानिए विचार का सही अर्थ व अध्यात्म में विचारशील होने का महत्व ! ” ~ ओशो

विचार करना अत्यंत जरूरी है। विचार का क्या मतलब? विचार से क्या संबंध? विचार का क्या अर्थ? क्या विचार का यह अर्थ है कि हम बहुत से विचार इकट्ठे कर लें तो हम विचारक हो जाएंगे? विचारों का संग्रह क्या ...

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“किसी का अनुकरण (फॉलोईंग) नहीं ! स्वयं का स्वीकार ! ” ~ ओशो

पहली बात, पहली कड़ी, पहली जंजीर, पहली गांठ जो हर मनुष्य ने अपने ऊपर बांध ली है, वह है अंधश्रद्धा की, अंधेपन की, आंख बंद कर लेने की, अनुकरण की, फॉलोईंग की, किसी के पीछे जाने की, किसी का अनुयायी ...

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“अहंकार क्या है? त्याग और भोग के अहंकार में क्या अंतर है?” – ओशो

अहंकार आदमी की कमजोरी है। दंभ, ईगो आदमी की कमजोरी है। मैं कुछ हूं, यह आदमी की कमजोरी है। और जब तक कोई इस कमजोरी से घिरा है, तब तक वह किन्हीं मंदिरों की तलाश करे और किन्हीं शास्त्रों को ...

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“अभय होने का क्या अर्थ है? अभय कैसे हों? भय से कैसे मुक्त हों?” – ओशो

कुछ लोगों ने भय से मुक्त होने की कोशिशें की हैं, तो वे इस तरह के भय से मुक्त हो गए हैं जो और घबड़ाने वाले और हंसाने वाले हैं। एक आदमी भय से मुक्त होना चाहता है, तो एक ...

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“क्या गॉड फियरिंग, ईश्वर-भीरु होना धार्मिक व्यक्ति की पहचान है?” – ओशो

भय, फियर धार्मिक आदमी का लक्षण नहीं है, क्योंकि जो भयभीत है वह कभी सत्य को नहीं खोज सकेगा और न सत्य को जान सकेगा। जो भयभीत है, वह कभी इस योग्य नहीं हो पाता कि वह सत्य का साक्षात ...

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‘विवेक और विचार’ धर्म का आधार है, ‘श्रद्धा और विश्वास’ नहीं !! ~ ओशो

मनुष्य के मन को निर्माण करने वाली बातों में जो सबसे बड़ी बुनियादी भूल हो गई, जिसकी वजह से वह अपनी तरफ आंख भी नहीं उठा पाता और वे लोग जो निरंतर कहते हैं अपने को जानो, आत्मा ...

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