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Exploring Inner Peace and Transformation through
Insights from Osho’s Teachings and his philosophies.

“बुद्ध ने चालीस वर्षों तक लोगों को क्या सिखाया?” – ओशो

भगवान बुद्ध ने ज्ञानोपलब्धि के तुरंत बाद कहा : स्वयं ही जानकर किसको गुरु कहूं और किसको सिखाऊं, किसको शिष्य बनाऊं? और फिर उन्होंने चालीस वर्षों तक लाखों लोगों को दीक्षित भी किया और सिखाया भी। लेकिन महापरिनिर्वाण ...

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“अप्प दीपो भव !” – ओशो

गौतम बुद्ध ऐसे हैं जैसे हिमाच्छादित हिमालय। पर्वत तो और भी हैं, हिमाच्छादित पर्वत और भी हैं, पर हिमालय अतुलनीय है। उसकी कोई उपमा नहीं है। हिमालय बस हिमालय जैसा है। गौतम बुद्ध बस गौतम बुद्ध जैसे। पूरी मनुष्य-जाति के ...

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“ध्यान और विचार !” – ओशो

ध्यान चेतना की विशुद्ध अवस्था है- जहां कोई विचार नहीं होते, कोई विषय नहीं होता। साधारणतया हमारी चेतना विचारों से, विषयों से,कामनाओं से आच्छादित रहती है। जैसे कि कोई दर्पण धूल से ढका हो। हमारा मन एक सतत प्रवाह है- ...

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“अंतर्यात्रा प्रारंभ कैसे की जाए?” – ओशो

यात्रा का प्रारंभ तो पहले ही से हो चुका है, तुम्हें वह शुरू नहीं करना है। प्रत्येक व्यक्ति पहले से यात्रा में ही है। हमने अपने आपको यात्रा पथ के मध्य में ही पाया है। इसकी न तो कोई शुरुआत ...

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“ध्यान के लिए समय कहां !” – ओशो

मेरे पास लोग आते हैं। कहते हैं : मन अशांत है, शांति चाहिए। अगर मैं उन्हें कहूं ध्यान करो, वे कहते हैं : समय कहां! अशांत होने को समय है, अशांत होने में चौबीस घंटे लगाते हैं-शांत होने ...

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